✍️ मोहित धवन
3 अक्टूबर 2026
मैंने अभी तक नर्मदा परिक्रमा नहीं की है।
लेकिन पिछले काफी समय से इस यात्रा के बारे में पढ़ रहा हूँ। सोशल मीडिया पर कभी किसी परिक्रमावासी का वीडियो सामने आ जाता है, कभी नर्मदा किनारे की सुबह, कभी किसी छोटे से गाँव में यात्रियों का पड़ाव, तो कभी किसी अनजान परिवार को परिक्रमावासियों के लिए भोजन की व्यवस्था करते देखता हूँ।
और इन्हें देखते-देखते एक अलग ही अनुभव होने लगा है।
मन में इच्छा लगातार बढ़ रही है—इसे स्क्रीन पर कब तक देखेंगे, एक बार वहाँ जाकर खुद अनुभव करना चाहिए।
इसी इच्छा के साथ एक सवाल भी मन में आया—
क्या नर्मदा परिक्रमा हिंदुस्तान को जानने और महसूस करने की सबसे खूबसूरत यात्राओं में से एक हो सकती है?
यहाँ रास्ता ही मंज़िल है
हमारी अधिकांश यात्राएँ किसी destination के लिए होती हैं। टिकट, होटल और घूमने की जगहें पहले से तय होती हैं। कुछ दिन घूमते हैं, तस्वीरें लेते हैं और वापस लौट आते हैं।
लेकिन नर्मदा परिक्रमा को जितना समझ रहा हूँ, इसकी प्रकृति उतनी ही अलग लगती है।
यहाँ कोई एक destination नहीं है।
रास्ता ही destination बन जाता है।
नर्मदा के साथ चलते रहना, घाटों पर रुकना, गाँवों से गुजरना, लोगों से मिलना और धीरे-धीरे उस जीवन को करीब से देखना, जिसे शायद कार की खिड़की से गुजरते हुए हम कभी देख ही नहीं पाते।
परिक्रमा और पर्यटन एक बात नहीं हैं
यह फर्क समझना शायद सबसे जरूरी है।
नर्मदा परिक्रमा मूलतः कोई sightseeing tour नहीं है। यह नर्मदा के प्रति आस्था से जुड़ी एक पुरानी धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा है। परिक्रमावासी संकल्प लेकर निकलते हैं और परंपरा के अनुसार इसके अपने नियम, मर्यादाएँ और जीवन-पद्धति होती है।
पर्यटन में हम स्थान देखने निकलते हैं; परिक्रमा में शायद स्वयं को उस यात्रा के हवाले करते हैं।
पर्यटन में हमारी सुविधा महत्वपूर्ण होती है—कहाँ रुकेंगे, क्या खाएँगे, कितने बजे पहुँचेंगे। परिक्रमा में सादगी, धैर्य, अनुशासन और अनिश्चितता को स्वीकार करना भी यात्रा का हिस्सा माना जाता है।
इसलिए कार से नर्मदा के प्रमुख स्थानों को देखना, कुछ दिन नदी के किनारे पैदल चलना या अलग-अलग हिस्सों में जाकर वहाँ के जीवन को समझना एक बहुत सुंदर अनुभव हो सकता है—लेकिन उसे पारंपरिक नर्मदा परिक्रमा कहना सही नहीं होगा।
दोनों के अपने अर्थ हैं।
एक नर्मदा को देखने-जानने की यात्रा हो सकती है, दूसरी नर्मदा के प्रति आस्था और साधना की परिक्रमा।
शायद यहाँ वह हिंदुस्तान मिलता है, जो हाईवे से दिखाई नहीं देता
हम आज भारत को अक्सर शहरों, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और होटलों के माध्यम से देखते हैं।
लेकिन इस देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा इनसे थोड़ा हटकर भी साँस लेता है।
नर्मदा परिक्रमा के वीडियो में मुझे केवल मंदिर, घाट या नदी आकर्षित नहीं करते। मुझे वे सामान्य लोग भी उतना ही आकर्षित करते हैं, जो किसी अनजान यात्री को पानी देते हैं, भोजन कराते हैं, रास्ता बताते हैं या रात बिताने की जगह उपलब्ध करा देते हैं।
शायद हिंदुस्तान को समझने के लिए उसके monuments से अधिक उसके लोगों के बीच जाना जरूरी है।
क्योंकि देश केवल उसका भूगोल नहीं होता।
देश उसके लोग होते हैं।
एक नदी के किनारे कितने हिंदुस्तान
नर्मदा लगभग 1,312 किलोमीटर लंबी नदी है। अमरकंटक से निकलकर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से गुजरते हुए अरब सागर तक पहुँचती है।
लेकिन परिक्रमा केवल नदी की लंबाई तय करना नहीं है। दोनों तटों और अलग-अलग परिक्रमा मार्गों को मिलाकर पूरी यात्रा की दूरी लगभग 2,600 से 3,500 किलोमीटर तक बताई जाती है।
इतनी लंबी यात्रा में भूगोल बदलता है, बोलियाँ बदलती हैं, भोजन बदलता है, पहनावा बदलता है। कहीं जंगल, कहीं खेत, कहीं पहाड़ और कहीं छोटे कस्बे मिलते हैं।
लेकिन इन सबके बीच एक चीज साथ रहती है—नर्मदा।
शायद यही हिंदुस्तान भी है—ऊपर से अलग-अलग, लेकिन भीतर किसी अदृश्य धारा से जुड़ा हुआ।
शुरुआत पूरी परिक्रमा से ही क्यों?
यदि कोई व्यक्ति धार्मिक संकल्प के साथ पारंपरिक नर्मदा परिक्रमा करना चाहता है, तो उसके नियमों और परंपराओं को पहले ठीक से समझना चाहिए। पूरी पदयात्रा कई महीनों की साधना हो सकती है।
लेकिन हर व्यक्ति की शुरुआत वहीं से हो, यह जरूरी नहीं।
मेरे जैसे किसी व्यक्ति के लिए, जो फिलहाल नर्मदा को समझना और महसूस करना चाहता है, शुरुआत एक नर्मदा यात्रा से भी हो सकती है।
सात दिन जाइए। दस दिन जाइए। किसी एक क्षेत्र को चुनिए। कुछ दूरी पैदल चलिए। गाँवों में रुकिए। घाटों पर समय बिताइए। लोगों से बात कीजिए।
फिर किसी वर्ष वापस जाकर नदी के किसी दूसरे हिस्से को समझिए।
कार या टैक्सी से प्रमुख स्थानों तक पहुँचा जा सकता है और बीच के चुने हुए हिस्सों को पैदल अनुभव किया जा सकता है। ठहरने के लिए आश्रम और धर्मशालाओं के अलावा प्रमुख शहरों और कस्बों में guest houses, lodges और hotels भी मिल सकते हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में सुविधाएँ सीमित हो सकती हैं, इसलिए पहले से जानकारी और तैयारी जरूरी है।
यह परिक्रमा नहीं होगी, लेकिन शायद परिक्रमा को समझने की शुरुआत जरूर हो सकती है।
शायद यात्रा बाहर से ज्यादा भीतर की है
नर्मदा परिक्रमा की जड़ें गहरी आस्था में हैं। लेकिन लंबे समय तक सीमित साधनों के साथ चलना व्यक्ति को अपने भीतर भी देखने का अवसर देता होगा।
मुझे वास्तव में कितना चाहिए?
जिन सुविधाओं को मैंने अनिवार्य मान लिया है, क्या वे सच में इतनी जरूरी हैं?
मैं किसी अनजान व्यक्ति पर कितना विश्वास कर सकता हूँ?
और क्या मैं स्वयं भी किसी अनजान व्यक्ति के लिए उतनी सहजता से अपना दरवाजा खोल सकता हूँ?
शायद किसी मोड़ पर परिक्रमा नदी के बाहर कम और अपने भीतर अधिक होने लगती होगी।
इसलिए यह यात्रा मुझे अपनी ओर खींच रही है
अभी मेरे लिए नर्मदा परिक्रमा एक अनुभव नहीं, एक जिज्ञासा और इच्छा है।
मैंने इसे अभी दूसरों की आँखों से देखा है—किसी वीडियो में, किसी पोस्ट में, किसी यात्रा-वृत्तांत में।
इसलिए यह दावा नहीं कर सकता कि नर्मदा परिक्रमा हिंदुस्तान को जानने की सबसे खूबसूरत यात्रा है।
लेकिन इतना जरूर महसूस करता हूँ कि यदि भारत को केवल देखना नहीं, बल्कि उसके लोगों के बीच जाकर महसूस करना है, तो नर्मदा के किनारे कुछ दूर चलकर जरूर देखना चाहिए।
हो सकता है मेरी शुरुआत परिक्रमा से न हो। शायद वह केवल कुछ दिनों की नर्मदा यात्रा हो।
लेकिन संभव है कि वही कुछ दिन मुझे यह समझा दें कि हजारों लोग सदियों से इस नदी के चारों ओर चलने के लिए क्यों निकलते रहे हैं।
और शायद किसी दिन मन स्वयं कहे—
अब नर्मदा को केवल देखने नहीं, उनकी परिक्रमा करने चलना है।
फिलहाल मन इतना ही कह रहा है—
एक बार चलकर देखना चाहिए…
नर्मदे हर। 🙏