मानकर जीने से जानकर जीने की ओर… मानव को समझने की एक नई यात्रा

मानव चेतना विकास केंद्र, इंदौर में एक माह के अध्ययन शिविर की शुरुआत ने जीवन के एक बुनियादी प्रश्न को सामने रखा—क्या हम वास्तव में मानव को समझते हैं, या केवल अपनी मान्यताओं के आधार पर जीते हैं? अजय दायमा जी के विचारों के माध्यम से पहचान, निर्वाह, कल्पनाशीलता और भाव को समझने की एक नई यात्रा का आरंभ।

लखनऊ की चिकनकारी: हुनर बेमिसाल, लेकिन कारीगर के हिस्से में क्या?

लखनऊ की मशहूर चिकनकारी… जहाँ एक साड़ी तैयार होने में तीन-चार महीने लग जाते हैं, वहीं कुशल कारीगर दिनभर मेहनत करके महज़ ₹300–400 कमा पाता है। बदलते फैशन, बढ़ती महँगाई और मशीनों के दौर में क्या यह सदियों पुराना हुनर अपनी पहचान बचा पाएगा? एक संवेदनशील पड़ताल उन हाथों की, जो कपड़ों पर खूबसूरती उकेरते हैं, लेकिन जिनकी अपनी ज़िंदगी संघर्षों से भरी है।

लखनऊ का इंतज़ार खत्म होने को है, पहली बार आएंगे चर्चित कथावाचक इंद्रेश जी महाराज

लखनऊ में पहली बार चर्चित कथावाचक इंद्रेश जी महाराज अपने पिता कृष्ण चंद्र शास्त्री जी महाराज के साथ आएंगे। 28 जनवरी से 4 फरवरी 2027 तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं को दो पीढ़ियों की आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ने का विशेष अवसर मिलेगा।

We Are Educating Our Children… But Are We Preparing Them for Life?

Is education merely about good grades, degrees, and successful careers? MCVK Vidyalaya, Indore, offers a thought-provoking approach that connects learning with self-understanding, human relationships, social responsibility, and harmony with nature. A question worth asking: Are we raising successful individuals or truly understanding human beings?

हम बच्चों को पढ़ा रहे हैं… लेकिन क्या उन्हें जीवन के लिए भी तैयार कर रहे हैं?

क्या अच्छी शिक्षा का अर्थ केवल अच्छे अंक, डिग्री और सफल करियर है? एमसीवीके विद्यालय, इंदौर का एक अनूठा प्रयोग शिक्षा को जीवन की समझ, संबंधों में न्याय, मानवीय मूल्यों और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व से जोड़ता है। एक विचारणीय प्रश्न—हम बच्चों को केवल सफल बना रहे हैं या समझदार मनुष्य भी?

परिवार, संस्कार और संबंध—कथा से निकले जीवन के कुछ सूत्र

परिवार, संस्कार, चरित्र और भक्ति—पुण्डरीक गोस्वामी जी महाराज की कथा में जीवन और संबंधों को समझने के कई सहज सूत्र सामने आए। सवाल यही है—जो हम सुनते और मानते हैं, वह हमारे आचरण में कितना दिखाई देता है?

क्या नर्मदा परिक्रमा हिंदुस्तान को जानने की सबसे खूबसूरत यात्रा हो सकती है?

मैंने अभी नर्मदा परिक्रमा नहीं की है, लेकिन जितना इसे पढ़ और देख रहा हूँ, उतना ही मन इसे स्वयं अनुभव करने को कहता है। क्या नर्मदा के किनारे चलना सिर्फ एक परिक्रमा है, या हिंदुस्तान और स्वयं को थोड़ा और करीब से जानने की यात्रा भी?

इस रविवार कुछ अलग हो जाए… Cornucopia के बहाने प्रकृति के थोड़ा करीब

इस रविवार इंदौर से कुछ ही दूरी पर MCVK का Cornucopia आपको प्रकृति, खेती, स्वाद, संगीत और सामूहिक जीवन के एक अलग अनुभव से मिलाता है। शायद यह सिर्फ एक दिन की outing नहीं, परिवार और दोस्तों के साथ संजोई जाने वाली एक खूबसूरत याद बन जाए।

गांधी-मार्ग से मोदी-मार्ग तक… आखिर इस नए रास्ते की पहचान क्या है?

वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय के एक वाक्य ने नया सवाल खड़ा किया है—अगर गांधी-मार्ग की पहचान ग्राम स्वराज से होती है, तो आखिर ‘मोदी-मार्ग’ को किस विचार और किस सूत्र से समझा जाए?

प्रभाष जोशी: जब अख़बार की भाषा में आदमी बोलता था

कभी रविवार का ‘जनसत्ता’ सिर्फ ‘कागद कारे’ पढ़ने के लिए तलाशा जाता था। प्रभाष जोशी की लेखनी में ऐसा क्या था कि किस्सा खत्म हो जाता था, लेकिन सवाल पाठक के भीतर रह जाता था? उन्हीं स्मृतियों से गुजरता एक निजी अनुभव।