पैकेट के पीछे छिपा सच, अब सामने आएगा?

खाद्य पदार्थों पर स्पष्ट चेतावनी की पहल ने उपभोक्ता के जानने के अधिकार को फिर बहस के केंद्र में ला दिया है

✍️ मोहित धवन
28 अगस्त 2026

बिस्किट खरीदते समय हम ब्रांड देखते हैं, चिप्स लेते समय स्वाद और कोल्ड ड्रिंक लेते समय कीमत या ऑफर। मगर कितनी बार पैकेट पलटकर देखते हैं कि उसमें चीनी, नमक या वसा (Fat) कितनी है?

यह जानकारी पैकेट पर पहले से मौजूद होती है, लेकिन अक्सर पीछे दी गई पोषण तालिका और आंकड़ों के बीच। आम उपभोक्ता के लिए यह समझना आसान नहीं कि दस या बारह ग्राम चीनी उसके लिए कितनी अधिक है। अब यही जानकारी पैकेट के सामने और अधिक स्पष्ट रूप में दिखाई दे सकती है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के सामने चेतावनी चिन्ह लगाने का प्रस्ताव रखा है। 28 अगस्त को सामने आई रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यदि किसी खाद्य पदार्थ में चीनी, नमक और वसा (Fat) में से दो या उससे अधिक की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होती है, तो पैकेट के सामने लाल रंग का छह कोनों वाला चेतावनी चिन्ह लगाया जा सकता है। इसका मकसद खरीदारी के समय ही उपभोक्ता को यह साफ बताना है कि उत्पाद में चीनी, नमक या वसा अधिक है।

इस प्रस्ताव के पीछे सुप्रीम कोर्ट की दखल भी अहम है।

फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से पैकेट के सामने चेतावनी देने की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करने को कहा था। अदालत ने मामले को नागरिकों के स्वास्थ्य के अधिकार से जोड़ते हुए इस बात पर जोर दिया कि चीनी, नमक और संतृप्त वसा की अधिक मात्रा के बारे में उपभोक्ता को ऐसी जानकारी मिलनी चाहिए, जिसे वह आसानी से समझ सके।

अगस्त में अदालत का रुख और सख्त हुआ। 13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस दिशा में हो रही देरी पर नाराजगी जताई और खासकर बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की। इसके बाद 27 अगस्त को अदालत ने केंद्र सरकार को इस मामले में निर्णय लेने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। साथ ही संकेत दिया कि सरकार जरूरी कदम नहीं उठाती है तो अदालत आगे निर्देश देने पर विचार कर सकती है।

यहीं से यह मामला केवल पैकेट पर एक लाल निशान लगाने तक सीमित नहीं रह जाता। मूल सवाल उपभोक्ता के जानने के अधिकार का है।

आज बिस्किट, नमकीन, चिप्स या कोई पेय पदार्थ खरीदते समय हमारे सामने आकर्षक पैकेजिंग, स्वाद, कीमत और ऑफर प्रमुखता से दिखाई देते हैं। लेकिन पोषण संबंधी जरूरी जानकारी जानने के लिए पैकेट पलटना पड़ता है। उसके बाद आंकड़ों से खुद तय करना होता है कि उत्पाद में मौजूद चीनी, नमक या वसा हमारे लिए कितनी उचित है।

अगर पैकेट के सामने ही साफ लिखा हो—“चीनी अधिक है”, “नमक अधिक है” या “वसा (Fat) अधिक है”—तो उपभोक्ता के लिए फैसला आसान हो सकता है।

हालांकि इस प्रस्ताव पर खाद्य उद्योग और जनस्वास्थ्य से जुड़े संगठनों की राय अलग-अलग है। उद्योग का तर्क है कि किसी उत्पाद को केवल कुछ पोषक तत्वों के आधार पर चेतावनी के दायरे में रखना उसकी पूरी पोषण संरचना को नहीं दर्शाता। दूसरी ओर स्वास्थ्य विशेषज्ञों और उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि हर ग्राहक से पैकेट के पीछे लिखे आंकड़ों को समझने और उनकी गणना करने की उम्मीद व्यावहारिक नहीं है।

फिलहाल FSSAI का प्रस्ताव अंतिम नियम नहीं है। इसकी अंतिम रूपरेखा क्या होगी, कौन से उत्पाद इसके दायरे में आएंगे और इसे कब से लागू किया जाएगा—यह अभी तय होना बाकी है।

लेकिन इस बहस ने एक महत्वपूर्ण सवाल हमारे सामने जरूर रख दिया है।

जिस चीज को हम और हमारे बच्चे रोज खाते हैं, उसके बारे में जरूरी जानकारी जानने के लिए क्या हमें पैकेट के पीछे छोटे अक्षर पढ़ने पड़ने चाहिए… या वह सच सामने साफ-साफ दिखाई देना चाहिए?

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