‘हनुमान अंश’ देखते हुए लौटी एक पुरानी स्मृति और मन में उठा एक सवाल ✍️ मोहित धवन7 सितंबर 2026 आज ‘हनुमान अंश’ देखकर सिनेमा हॉल से बाहर निकला तो मन प्रसन्न था, लेकिन फिल्म मुझे करीब 33–34 साल पीछे भी ले गई। बात शायद 1992-93 के आसपास की है। हमारे एक शिक्षक हुआ करते थे—रमेशContinue reading “आखिर ऐसा क्या है बाबा नीब करोरी में?”
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RSS के सौ साल: क्या चाल, चरित्र और चेहरा बदल रहा है?
शाखा और चरित्र निर्माण से सत्ता के करीब तक, गांधी-अंबेडकर से आर्थिक असमानता तक—एक सदी की यात्रा कुछ नए सवाल भी खड़े करती है ✍️ मोहित धवन5 सितंबर 2026 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS की सौ साल की यात्रा को केवल हिंदुत्व या राजनीति की कहानी मानना शायद अधूरी तस्वीर देखना होगा। यह एक ऐसेContinue reading “RSS के सौ साल: क्या चाल, चरित्र और चेहरा बदल रहा है?”
‘Winning Through Execution’: A Book Rooted in the Real World of Sales
✍️ Mohit Dhawan 3 September 2026, Some books introduce us to their authors. In the case of Winning Through Execution, it is the other way around for me. I have known its author, Maneesh Kapur, since the days when we both worked with PepsiCo India. I was based in Delhi at the time, while ManeeshContinue reading “‘Winning Through Execution’: A Book Rooted in the Real World of Sales”
कृष्ण और सुदामा: क्या दोस्ती अब भी बिना हैसियत देखे होती है?
पंद्रह साल बाद एक पुराने मित्र से हुई बातचीत ने याद दिलाया कि समय हमारी परिस्थितियां बदल सकता है, लेकिन कुछ रिश्तों में अपनापन शायद वहीं ठहरा रहता है। ✍️ मोहित धवन2 सितंबर 2026 कल अचानक एक पुराने मित्र का फोन आया। बात शुरू हुई तो एहसास हुआ कि शायद करीब 15 साल बाद हमContinue reading “कृष्ण और सुदामा: क्या दोस्ती अब भी बिना हैसियत देखे होती है?”
क्या हम कुछ सीखेंगे? — प्रकृति के साथ जीना कब सीखेंगे?
नेपाल की त्रासदी केवल एक आपदा की कहानी नहीं, यह हमारे विकास, बढ़ती जरूरतों और प्रकृति के साथ रिश्ते को फिर से समझने का सवाल भी है ✍️ मोहित धवन31 अगस्त 2026 नेपाल की त्रासदी पर इस series के पहले हिस्से में हमने तबाही और जिंदगी बचाने की जंग देखी। दूसरे हिस्से में सवाल उठाया—आखिरContinue reading “क्या हम कुछ सीखेंगे? — प्रकृति के साथ जीना कब सीखेंगे?”
नेपाल की बाढ़—आखिर जिम्मेदार कौन?
प्रकृति, बदलता हिमालय या विकास की हमारी समझ—नेपाल की त्रासदी कई ऐसे सवाल छोड़ गई है, जिनसे अब बचना मुश्किल है ✍️ मोहित धवन30 अगस्त 2026 नेपाल की त्रासदी पर इस series का पहला हिस्सा लिखते समय मेरे मन में एक सवाल था—क्या ऐसी घटनाओं की खबरें पढ़ते-पढ़ते हम इनके अभ्यस्त होते जा रहे हैं?Continue reading “नेपाल की बाढ़—आखिर जिम्मेदार कौन?”
कुछ मिनटों में सब बह गया: नेपाल में अब अपनों की तलाश और जिंदगी बचाने की जंग
सैकड़ों मौतें, हजारों लोग लापता और उजड़े गांव—26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल में राहत और बचाव की लड़ाई अभी जारी है ✍️ मोहित धवन29 अगस्त 2026 काफी सोचा कि इस पर कुछ न लिखूं। आखिर अब ऐसी घटनाएं इतनी बार हमारे सामने आने लगी हैं कि एक त्रासदी की तस्वीरें आंखों सेContinue reading “कुछ मिनटों में सब बह गया: नेपाल में अब अपनों की तलाश और जिंदगी बचाने की जंग”
पैकेट के पीछे छिपा सच, अब सामने आएगा?
खाद्य पदार्थों पर स्पष्ट चेतावनी की पहल ने उपभोक्ता के जानने के अधिकार को फिर बहस के केंद्र में ला दिया है ✍️ मोहित धवन28 अगस्त 2026 बिस्किट खरीदते समय हम ब्रांड देखते हैं, चिप्स लेते समय स्वाद और कोल्ड ड्रिंक लेते समय कीमत या ऑफर। मगर कितनी बार पैकेट पलटकर देखते हैं कि उसमेंContinue reading “पैकेट के पीछे छिपा सच, अब सामने आएगा?”
Has Rakhi Changed… or Have Relationships?
✍️ Mohit Dhawan Technology has reduced distances, but has it increased the time we give to our relationships? Date: 27 August 2026 As Raksha Bandhan approaches, countless old memories come alive. A sister choosing her Rakhi days in advance, sweets arriving at home, a brother saving money for the traditional shagun, and that familiar teasingContinue reading “Has Rakhi Changed… or Have Relationships?”
न्यूज़ चैनल बदल गए… या दर्शक?
टीवी के शोर से पॉडकास्ट की लंबी बातचीत तक ✍️ मोहित धवन25 अगस्त 2026 भारतीय टेलीविजन पर रात जैसे-जैसे गहराती है, बहस भी तेज होती जाती है। स्क्रीन कई हिस्सों में बंटती है, चेहरे बढ़ते जाते हैं और आवाजें एक-दूसरे पर चढ़ने लगती हैं। एंकर सवाल पूछता है, जवाब शुरू होता है और उससे पहलेContinue reading “न्यूज़ चैनल बदल गए… या दर्शक?”