क्या हम कुछ सीखेंगे? — प्रकृति के साथ जीना कब सीखेंगे?

नेपाल की त्रासदी केवल एक आपदा की कहानी नहीं, यह हमारे विकास, बढ़ती जरूरतों और प्रकृति के साथ रिश्ते को फिर से समझने का सवाल भी है ✍️ मोहित धवन31 अगस्त 2026 नेपाल की त्रासदी पर इस series के पहले हिस्से में हमने तबाही और जिंदगी बचाने की जंग देखी। दूसरे हिस्से में सवाल उठाया—आखिरContinue reading “क्या हम कुछ सीखेंगे? — प्रकृति के साथ जीना कब सीखेंगे?”

नेपाल की बाढ़—आखिर जिम्मेदार कौन?

प्रकृति, बदलता हिमालय या विकास की हमारी समझ—नेपाल की त्रासदी कई ऐसे सवाल छोड़ गई है, जिनसे अब बचना मुश्किल है ✍️ मोहित धवन30 अगस्त 2026 नेपाल की त्रासदी पर इस series का पहला हिस्सा लिखते समय मेरे मन में एक सवाल था—क्या ऐसी घटनाओं की खबरें पढ़ते-पढ़ते हम इनके अभ्यस्त होते जा रहे हैं?Continue reading “नेपाल की बाढ़—आखिर जिम्मेदार कौन?”

कुछ मिनटों में सब बह गया: नेपाल में अब अपनों की तलाश और जिंदगी बचाने की जंग

सैकड़ों मौतें, हजारों लोग लापता और उजड़े गांव—26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल में राहत और बचाव की लड़ाई अभी जारी है ✍️ मोहित धवन29 अगस्त 2026 काफी सोचा कि इस पर कुछ न लिखूं। आखिर अब ऐसी घटनाएं इतनी बार हमारे सामने आने लगी हैं कि एक त्रासदी की तस्वीरें आंखों सेContinue reading “कुछ मिनटों में सब बह गया: नेपाल में अब अपनों की तलाश और जिंदगी बचाने की जंग”

पैकेट के पीछे छिपा सच, अब सामने आएगा?

खाद्य पदार्थों पर स्पष्ट चेतावनी की पहल ने उपभोक्ता के जानने के अधिकार को फिर बहस के केंद्र में ला दिया है ✍️ मोहित धवन28 अगस्त 2026 बिस्किट खरीदते समय हम ब्रांड देखते हैं, चिप्स लेते समय स्वाद और कोल्ड ड्रिंक लेते समय कीमत या ऑफर। मगर कितनी बार पैकेट पलटकर देखते हैं कि उसमेंContinue reading “पैकेट के पीछे छिपा सच, अब सामने आएगा?”

Has Rakhi Changed… or Have Relationships?

✍️ Mohit Dhawan Technology has reduced distances, but has it increased the time we give to our relationships? Date: 27 August 2026 As Raksha Bandhan approaches, countless old memories come alive. A sister choosing her Rakhi days in advance, sweets arriving at home, a brother saving money for the traditional shagun, and that familiar teasingContinue reading “Has Rakhi Changed… or Have Relationships?”

न्यूज़ चैनल बदल गए… या दर्शक?

टीवी के शोर से पॉडकास्ट की लंबी बातचीत तक ✍️ मोहित धवन25 अगस्त 2026 भारतीय टेलीविजन पर रात जैसे-जैसे गहराती है, बहस भी तेज होती जाती है। स्क्रीन कई हिस्सों में बंटती है, चेहरे बढ़ते जाते हैं और आवाजें एक-दूसरे पर चढ़ने लगती हैं। एंकर सवाल पूछता है, जवाब शुरू होता है और उससे पहलेContinue reading “न्यूज़ चैनल बदल गए… या दर्शक?”

Gen-Z को वोटर नहीं, ऑडियंस की तरह क्यों देखने लगी है राजनीति?

मोदी की रील्स से राहुल के युवा संवाद तक—क्या 2029 की सियासी लड़ाई अब मोबाइल स्क्रीन पर लड़ी जाएगी? लेखक ✍️ मोहित धवन24 अगस्त 2026 सुबह उठते ही मोबाइल हाथ में आता है। कुछ मैसेज, कुछ खबरें, कोई मजेदार मीम और फिर एक के बाद एक रील्स। इन्हीं के बीच अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काContinue reading “Gen-Z को वोटर नहीं, ऑडियंस की तरह क्यों देखने लगी है राजनीति?”

कभी-कभी अपनी कहानी भी कहनी चाहिए… आशीष विद्यार्थी आज लखनऊ में

✍️ मोहित धवनलखनऊ, 23 अगस्त 2026 जिंदगी में हम सब कोई न कोई किरदार निभाते रहते हैं—किसी के बेटे, किसी के पिता, किसी के साथी, किसी संस्थान के कर्मचारी। इन्हें निभाते-निभाते कभी अचानक मन पूछ बैठता है—इन सबके बीच मेरी अपनी कहानी कहाँ है? आज लखनऊ आ रहे अभिनेता आशीष विद्यार्थी को देखकर कुछ ऐसाContinue reading “कभी-कभी अपनी कहानी भी कहनी चाहिए… आशीष विद्यार्थी आज लखनऊ में”

The Road to the Weekly Market… Are We Slowly Forgetting It?

✍️ Mohit DhawanLucknow, 23 August 2026 Perhaps there is a weekly market somewhere near your home too. There may be someone’s father or uncle sitting behind a small stall, earning a living and supporting his family through what he sells that day. There was a time when such markets were a natural part of ourContinue reading “The Road to the Weekly Market… Are We Slowly Forgetting It?”

Ghevar, Rain and Rakhi… A Story of Flavour and Relationships

Writer ✍️ Mohit DhawanLucknow, 22 August 2026 The gentle showers of rain, the earthy fragrance of wet soil, and the greenery of Sawan bring back countless memories. For me, one such beautiful memory of the monsoon has always been connected with Ghevar. Ghevar has always been one of my favourite Indian sweets. Especially during SawanContinue reading “Ghevar, Rain and Rakhi… A Story of Flavour and Relationships”