स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस के विद्यार्थियों ने एमसीवीके में समझा जीवन, शिक्षा और व्यवस्था का वैकल्पिक मॉडल

लेखक : मोहित धवन

इंदौर, 31 जुलाई 2026।
रिनेसां यूनिवर्सिटी, इंदौर के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस के 60 से अधिक विद्यार्थियों ने शुक्रवार को मानव चेतना विकास केंद्र (एमसीवीके), इंदौर का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने एमसीवीके के सह-अस्तित्व आधारित जीवन मॉडल, मानवीय व्यवस्था, जैविक खेती और वैकल्पिक शिक्षा प्रणाली को निकट से समझने का प्रयास किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. अभय वानखेड़े ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए एमसीवीके की कार्यप्रणाली से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में एमसीवीके में 51 परिवारों के 186 सदस्य एक साथ रहते हैं। यहां सभी का कॉमन किचन है और पूरा परिसर सहअस्तित्व वाद के समझ की रौशनी में संचालित होता है। संस्था में कोई नौकर या मालिक नहीं है, बल्कि प्रत्येक सदस्य अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन विवेक पूर्वक स्वयं करता है।

उन्होंने बताया कि एमसीवीके में 150 से अधिक उत्पादों का निर्माण किया जाता है, जैविक खेती की जाती है तथा गौशाला में 150 गिर नस्ल की गायों की देखभाल भी परिवार के सदस्य स्वयं करते हैं। उनका कहना था कि एमसीवीके का उद्देश्य केवल आत्मनिर्भर जीवन नहीं, बल्कि पूरकता, विश्वास और सह-अस्तित्व पर आधारित अखण्ड समाज सर्वाभौम व्यवस्था को व्यवहार में उतारना है।

इसके बाद प्राची कौल पटेल ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि आज हम समाज और देश में होने वाले विरोध प्रदर्शनों की चर्चा तो करते हैं, लेकिन वास्तव में हर व्यक्ति के भीतर भी व्यवस्था (सिस्टम) को लेकर एक निरंतर संघर्ष और एक मौन ‘प्रोटेस्ट’ चलता रहता है। हमारी इच्छाएँ और जीवन की वास्तविकताएँ अक्सर एक-दूसरे से टकराती हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हम चाहते हैं कि हम कम समय में अपने गंतव्य तक पहुँच जाएँ, लेकिन साथ ही यह भी चाहते हैं कि प्रदूषण न फैले। हम विकास भी चाहते हैं और प्रकृति का संरक्षण भी। जब तक इन विरोधाभासों को समझा नहीं जाएगा, तब तक केवल बाहरी बदलाव पर्याप्त नहीं होंगे।

प्राची ने कहा कि मानव चेतना विकास केंद्र इसी आंतरिक संघर्ष को समझने और शांत करने का एक शैक्षणिक मॉडल है। यहां शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना या रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि मनुष्य को स्वयं, समाज और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की समझ विकसित करना है।

इसके बाद सौम्या पांडेय ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर विचार रखते हुए कहा कि बचपन से विद्यार्थियों को यही बताया जाता है कि “यह परीक्षा पास कर लो, फिर जीवन आसान हो जाएगा।” लेकिन वास्तविक जीवन में सफलता केवल डिग्री या नौकरी से तय नहीं होती।

उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण गैप्स हैं। शिक्षा व्यक्ति को जीवन की चुनौतियों, संबंधों, निर्णय क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारियों के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं कर पाती। एमसीवीके इन कमियों को दूर करने का प्रयास करते हुए ऐसी शिक्षा पर काम कर रहा है, जो व्यक्ति के समग्र विकास पर आधारित हो।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने सवाल किया कि जब यहां रहने वाले लोग पारंपरिक नौकरी या व्यवसाय नहीं करते, तब भी वे आत्मनिर्भर, निडर और विश्वास के साथ जीवन कैसे जीते हैं?

इस प्रश्न का उत्तर देते हुए डॉ. अभय वानखेड़े ने कहा कि एमसीवीके मूल रूप से जीवन जीने का एक व्यावहारिक शिक्षा मॉडल है। यहां केवल कौशल (स्किल) नहीं, बल्कि मानव जीवन को समझने, समझाने को प्रमुखता दी जाती है।

उन्होंने बताया कि वर्षभर परिचय, विकल्प और अध्ययन शिविरों के माध्यम से बच्चों और बड़ों को एमसीवीके आने का आमंत्रण दिया जाता है। इन शिविरों में प्रतिभागियों को जीवन, संबंध, मानवीय व्यवस्था और सह-अस्तित्व को समझने का अवसर मिलता है।

डॉ. वानखेड़े ने कहा कि जब व्यक्ति भयमुक्त होकर समाधान और समृद्धि के साथ जीना सीख लेता है, तब उसके भीतर उदारता पूर्वक जीने का, मानवीय व्यवस्था की परंपरा के लिए सामर्थ स्वाभाविक रूप से विकसित हो जाता है। ऐसी समझ के आधार पर वह अपनी समझ, क्षमताओं और कौशल का उपयोग करते हुए जीवन में मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनता है। उनका कहना था कि एमसीवीके का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसा व्यक्ति तैयार करना है जो अस्तित्व सहज़ प्रावधानो के अनुसार स्वयं समाधानित हो सके और समृद्धि पूर्वक बिना भय के जीवन जी सके।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने एमसीवीके परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने जैविक खेती, गौशाला, विभिन्न उत्पादन इकाइयों और समझ आधारित जीवन को निकट से देखा तथा सदस्यों से संवाद भी किया।

कैंपस भ्रमण का नेतृत्व एमसीवीके की ओर से अशोक भैया, श्रवण दवे भैया और तारकेश भैया ने किया। वहीं स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस की ओर से प्रो. ईमा सावरकर, विश्वास पटेल, अमोल पटेल, तनिष लोवंशी, हर्षित, दिगपाल ने कार्यक्रम का समन्वय किया।

Leave a comment