आज लखनऊ में एक अलग रंग में नजर आएंगे कुमार सत्यम

✍️ मोहित धवन
लखनऊ | 17 सितंबर 2026

आज शाम लखनऊ में भजन सिर्फ सुने नहीं जाएंगे, उन्हें साथ मिलकर गाने और महसूस करने की कोशिश भी होगी। Dr. B.R. Ambedkar Auditorium में जब कुमार सत्यम हारमोनियम के सामने बैठेंगे, तो महफ़िल पारंपरिक भजन संध्या से कुछ अलग होगी। EUM—Emotion, Unity & Music में आज का खास आकर्षण है—Bhajan Jamming

यानी एक तरफ कलाकार के सुर और दूसरी तरफ श्रोताओं की आवाज़। कोशिश शायद यही होगी कि कुछ देर के लिए मंच और सभागार के बीच की दूरी मिट जाए।

लेकिन कुमार सत्यम हैं कौन?

जो लोग पहली बार उनका नाम सुन रहे हैं, उनके लिए उनका सफर दिलचस्प है। कुमार सत्यम ग़ज़ल, सूफी, भजन और सेमी-क्लासिकल गायकी से जुड़े गायक और हारमोनियम वादक हैं। संगीत उन्हें विरासत में मिला है। वे संगीत परंपरा की 13वीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं और पं. ललन जी महाराज तथा पं. रामाशीष महाराज के संगीत परिवार से आते हैं।

लेकिन विरासत रास्ता दे सकती है, पहचान कलाकार को खुद बनानी पड़ती है।

कुमार सत्यम की गायकी में पुरानी ग़ज़लों की नज़ाकत, सूफियाना संगीत की रूहानियत और भजन की सहजता एक साथ दिखाई देती है। हारमोनियम के सामने वे केवल गाते नहीं; किस्सों, संवाद और अपने सहज अंदाज़ से श्रोताओं को महफ़िल का हिस्सा बनाते चलते हैं। शायद यही जुड़ाव उनकी प्रस्तुतियों को अलग बनाता है।

और आज लखनऊ उन्हें एक दूसरे रंग में सुनने जा रहा है।

भजन हमारे यहां कभी केवल मंचीय प्रस्तुति नहीं रहा। मंदिर की आरती हो, घर का पूजा स्थल या मोहल्ले की भजन संध्या—एक आवाज़ उठती है और दूसरी आवाज़ें उसमें जुड़ती चली जाती हैं। Bhajan Jamming उसी सामूहिक भाव की आधुनिक अभिव्यक्ति बन सकती है।

लखनऊ खुद संगीत, कविता और महफ़िलों का शहर है। ऐसे में आज शाम सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि कुमार सत्यम कौन-सा भजन गाते हैं।

सवाल यह भी होगा कि क्या उनके सुर पूरे सभागार को एक स्वर में जोड़ पाते हैं?

शाम अभी बाकी है। महफ़िल अभी सजनी है।

और शायद आज कोई ऐसा सुर भी निकले, जो कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी लखनऊ के साथ कुछ दूर तक चलता रहे।

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