✍️ मोहित धवन
इंदौर | 1 अक्टूबर 2026

4 अक्टूबर, रविवार। साथ में लंबा वीकेंड भी।
जाहिर है, हममें से बहुत से लोग सोच रहे होंगे—इस छुट्टी में क्या किया जाए? परिवार के साथ कहीं बाहर निकलें, दोस्तों से मिलें, बच्चों को कहीं घुमाएं या फिर रोज की तरह यह रविवार भी आते-जाते निकल जाए।
तो चलिए, आपके इस रविवार और लंबे वीकेंड को थोड़ा अलग और शायद यादगार बनाने का एक विचार देते हैं।
अगर आप इंदौर में हैं और शहर से करीब 15 किलोमीटर की दूरी तय कर सकते हैं, तो मानव चेतना विकास केंद्र (MCVK) में 4 अक्टूबर को होने वाला ‘Cornucopia’ आपके लिए एक अलग अनुभव हो सकता है।
यहां दिन की शुरुआत सुबह 6:30 बजे पक्षियों के साथ होगी। MCVK परिसर में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की 150 से अधिक प्रजातियां देखी जाती हैं। Birdwatching करते हुए सुबह बिताना बच्चों के लिए भी उतना ही दिलचस्प हो सकता है, जितना बड़ों के लिए।
फिर आसमान में उड़ते पक्षियों से कहानी जमीन और हमारी थाली तक पहुंचती है।
यहां Farm to Table केवल आकर्षक शब्द नहीं है। खेतों में प्राकृतिक तरीके से उगी उपज को यहां के परिवार अपने हाथों से भोजन में बदलेंगे और वही ताजा खाना आपकी थाली तक पहुंचेगा।
जरा सोचिए—हम रोज खाना खाते हैं, लेकिन कितनी बार उस मिट्टी को देखते हैं जहां हमारा भोजन उगा? दूध पीते हैं, लेकिन गाय और उसकी देखभाल करने वाले हाथ हमारे जीवन से लगभग गायब हो चुके हैं। कपड़े पहनते हैं, लेकिन करघे तक हमारा रिश्ता शायद ही कभी पहुंचता है।
Cornucopia इन्हीं छूटते हुए रिश्तों को एक दिन फिर थोड़ा करीब लाने की कोशिश है।
यहां खेत हैं, गिर गायों की गौशाला है, Handloom है, Bakery है और प्राकृतिक व हस्तनिर्मित उत्पाद हैं। Food और shopping के साथ live music भी होगा। बच्चों के लिए Twig Art, Rock Painting और Block Printing Bags जैसी गतिविधियां होंगी। अच्छे तैराक प्राकृतिक तालाब में swimming का आनंद भी ले सकेंगे।
इस पूरे उत्सव की एक और खूबसूरत बात है। इसकी तैयारी केवल कुछ लोगों की जिम्मेदारी नहीं है। कोई खेती संभाल रहा है, कोई गौशाला, कोई Handloom, कोई Bakery और कोई भोजन। बच्चे भी देखते, सीखते और अपने छोटे-छोटे हाथों से इस सामूहिकता का हिस्सा बनते हैं।
उत्सव एक दिन का है, लेकिन उसके पीछे कई परिवारों का श्रम और सहभागिता है।
MCVK के संस्थापक अजय दायमा की पहल में विकसित इस जगह की शायद सबसे खास बात भी यही है—यहां विचार केवल कहे नहीं जाते, उन्हें रोजमर्रा के जीवन में उतारने की कोशिश होती है। खेती हो, भोजन हो, उत्पादन हो या आपसी संबंध—प्रकृति और मनुष्य को अलग-अलग नहीं, एक-दूसरे से जुड़ा हुआ देखने का प्रयास यहां महसूस होता है।
इसी सोच की एक झलक Cornucopia के Humane Exchange System में भी मिलेगी।
हम बाजार जाते हैं—कीमत देखी, पैसे दिए, सामान लिया और आगे बढ़ गए। लेकिन किसी वस्तु के पीछे केवल उसकी कीमत नहीं होती। उसके पीछे प्रकृति के संसाधन, किसी का समय, कौशल और श्रम भी होता है। यदि हम उसे भी देख पाएं तो शायद विनिमय केवल पैसे और सामान का लेन-देन नहीं रह जाता।
इसलिए Cornucopia को केवल Food, Shopping, Music और Fun का कार्यक्रम समझना इसके दायरे को छोटा कर देगा। ये सब यहां हैं, लेकिन इनके बीच प्रकृति, श्रम और मनुष्य को जोड़ता एक धागा भी है।
तो अगर आपने अभी तक इस रविवार का कार्यक्रम नहीं बनाया है, एक बार इस विकल्प पर जरूर सोचिए।
और जाइए तो अकेले मत जाइए। अपने परिवार और कुछ करीबी दोस्तों को साथ ले जाइए।
सुबह पक्षियों के बीच चलिए, खेत देखिए, गौशाला जाइए, संगीत सुनिए, वहीं का बना भोजन चखिए और बच्चों को मिट्टी, रंग और खुले आसमान के साथ कुछ समय बिताने दीजिए।
हो सकता है लौटते समय आपके मोबाइल में बहुत सारी तस्वीरें हों।
लेकिन उससे भी खूबसूरत यह होगा कि आपके साथ कुछ ऐसी यादें लौटें, जिन्हें तस्वीरों की जरूरत ही न पड़े।
यकीन मानिए, कभी-कभी एक रविवार सिर्फ छुट्टी नहीं होता—वह अपनों के साथ बिताई जिंदगी की एक खूबसूरत याद बन जाता है।

