✍️ लेखक : मोहित धवन

इंदौर, 3 अगस्त 2026। मानव चेतना विकास केंद्र (एमसीवीके), इंदौर मे आयोजित दस दिवसीय विकल्प शिविर के तीसरे दिन के प्रथम सत्र में संस्थापक अजय दायमा ने “संपर्क से संबंध की यात्रा” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल लोगों के संपर्क में आना नहीं, बल्कि समझ, विश्वास और स्वीकृति के आधार पर सार्थक संबंधों का निर्माण करना है।
उन्होंने कहा कि जब किसी परिवार में बच्चे का जन्म होता है या विवाह के माध्यम से दो व्यक्ति एक साथ आते हैं, तब केवल संपर्क स्थापित होता है। वास्तविक संबंध तब बनता है, जब दोनों एक-दूसरे को समझते हैं, स्वीकार करते हैं और परस्पर सहयोग के साथ जीवन जीना सीखते हैं। उनके अनुसार संपर्क से संबंध तक की यह यात्रा ही मानव जीवन को सार्थक बनाती है।
अजय दायमा ने कहा कि इस संसार में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति प्रारंभ में एक-दूसरे के लिए अजनबी होता है। हम सभी इस धरती पर मेहमान बनकर आए हैं। अजनबी से परिचय, परिचय से सहमति और सहमति से स्वीकृति तक की यात्रा ही स्वस्थ और स्थायी संबंधों का आधार है।
उन्होंने बच्चों और बड़ों की सोच का अंतर बताते हुए कहा कि छोटे बच्चों को घर में मेहमान का आना अच्छा लगता है और उनका जाना बुरा लगता है, जबकि बड़े लोगों को अक्सर मेहमान का आना असुविधाजनक और उनका जाना राहत देने वाला प्रतीत होता है। यह अंतर उम्र का नहीं, बल्कि जीवन की समझ का है। सही समझ विकसित होने पर व्यक्ति का दृष्टिकोण और व्यवहार दोनों बदल जाते हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रत्येक बालक जन्म से गलती करने का अधिकार लेकर पैदा होता है। प्रत्येक मनुष्य अपनी कल्पनाशीलता के साथ है और उसकी कल्पनाशीलता ही उसे सृजन, नवाचार और विकास की क्षमता प्रदान करती है। लेकिन जब यही कल्पनाशीलता सही समझ के बिना संचालित होती है, तब भ्रम उत्पन्न होता है और व्यक्ति गलतियाँ कर बैठता है। इसलिए गलती को दंड का विषय नहीं, बल्कि सीखने और सही समझ विकसित करने की प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, सामाजिक व्यवस्था और परिवार, व्यक्ति को सही समझ विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। इसी सही समझ के आधार पर मनुष्य समाधान, समृद्धि और अभयता के साथ सार्थक एवं संतुलित जीवन जी सकता है। यदि परिवार और शिक्षा व्यवस्था व्यक्ति की कल्पनाशीलता को सही दिशा दें, तो वही कल्पनाशीलता भ्रम का कारण बनने के बजाय समाधान, सहयोग और सह-अस्तित्व की आधारशिला बन जाती है।
इस अवसर पर चेन्नई से आए अंतरराष्ट्रीय लाइफ कोच, लेखक एवं पिछले 35 वर्षों से प्रशिक्षण दे रहे सैफी सरैया ने भी अपने विचार साझा किए। Zero Medicine Wisdom पुस्तक के लेखक सैफी सरैया ने कहा कि वे एमसीवीके में चल रहे जीवन विद्या के कार्यों से गहराई से प्रभावित हैं। उनका मानना है कि जीवन विद्या मनुष्य को स्वयं, परिवार और समाज को समझने का एक व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि वे इस विचार को और गहराई से समझकर एमसीवीके के साथ जुड़ना चाहते हैं तथा जीवन विद्या के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में अपना योगदान देना चाहते हैं। उनके अनुसार आज की दुनिया में मानसिक तनाव, असंतुलन और सामाजिक संघर्षों का स्थायी समाधान सही जीवन-दृष्टि और सही समझ के माध्यम से ही संभव है, और जीवन विद्या इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।