इतिहास के अनछुए अध्यायों को सामने लाने का एक गंभीर प्रयास

पुस्तक समीक्षा

लेखक: मोहित धवन

इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का विवरण नहीं होता, बल्कि वह किसी राष्ट्र की स्मृति, चेतना और पहचान का आधार भी होता है। देश दीपक शर्मा की पुस्तक “भारतवर्ष में इस्लाम का इतिहास: हिन्दू दृष्टिकोण” इतिहास के ऐसे ही कम चर्चित अध्यायों को पाठकों के सामने रखने का एक गंभीर और अध्ययनपूर्ण प्रयास है। पुस्तक का प्रथम खंड 712 ईस्वी से 1194 ईस्वी तक के लगभग पाँच सौ वर्षों के कालखंड को भारतीय सभ्यता के प्रतिरोध और संघर्ष के दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है।

देश दीपक जी और उनकी सहधर्मिणी नंदिता जी से हमारे परिवार का परिचय भले ही कुछ महीनों पुराना हो, लेकिन उनके स्नेह, आत्मीयता और सहज अपनत्व ने इस संबंध को बहुत निकटता का एहसास दिया है। अपने दिवंगत पुत्र तन्मय की स्मृति को समाज सेवा का माध्यम बनाते हुए लखनऊ के ग्रामीण अंचलों में बच्चों के लिए अध्ययन केंद्रों का संचालन करना उनके व्यक्तित्व की संवेदनशीलता और सामाजिक प्रतिबद्धता का परिचायक है। उनका यह सेवा कार्य हमें निरंतर प्रेरित करता रहा है। यही संवेदनशीलता इस पुस्तक की भूमिका में भी दिखाई देती है, जहाँ उन्होंने इस कृति को अपने पुत्र की स्मृति को समर्पित करते हुए उसे एक भावनात्मक आयाम प्रदान किया है।

एक पाठक के रूप में इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी भाषा और प्रस्तुति लगी। इतिहास जैसे गंभीर विषय को लेखक ने सरल, प्रवाहपूर्ण और रोचक शैली में प्रस्तुत किया है। घटनाओं का वर्णन केवल तिथियों और तथ्यों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कथा शैली में आगे बढ़ता है, जिससे पाठक सहज रूप से पुस्तक के साथ जुड़ जाता है।

पुस्तक की विषय-सूची ही लेखक के व्यापक अध्ययन का परिचय देती है। सिंध के युद्ध से लेकर बप्पा रावल, सम्राट मिहिर भोज, महाराजा सुहेलदेव, नायकी देवी और पृथ्वीराज चौहान जैसे अनेक ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और घटनाओं को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। साथ ही आगे प्रकाशित होने वाले खंडों की रूपरेखा यह संकेत देती है कि लेखक इस विषय पर एक विस्तृत और दीर्घकालिक श्रृंखला तैयार कर रहे हैं।
यह पुस्तक केवल ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन नहीं करती, बल्कि पाठक को इतिहास के अनेक पहलुओं पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है। पढ़ते समय बार-बार यह अनुभव होता है कि लेखक केवल घटनाएँ नहीं बता रहे, बल्कि इतिहास के कुछ ऐसे प्रसंगों की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं, जिन पर वे अधिक संवाद और अध्ययन की आवश्यकता महसूस करते हैं।

समग्र रूप से, “भारतवर्ष में इस्लाम का इतिहास: हिन्दू दृष्टिकोण” एक ऐसी कृति है, जो अपने विषय, अध्ययन और प्रभावशाली प्रस्तुति के कारण पाठक का ध्यान आकर्षित करती है। इतिहास में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक न केवल एक रोचक अध्ययन है, बल्कि भारतीय इतिहास के एक वैकल्पिक दृष्टिकोण को समझने का अवसर भी प्रदान करती है। ऐसी शोधपरक और विचारोत्तेजक पुस्तकों का स्वागत होना चाहिए, क्योंकि वे इतिहास के प्रति जिज्ञासा और संवाद—दोनों को आगे बढ़ाती हैं।

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