जब हमारी कामना शुभ है, तो कल्पना अशुभ क्यों? MCVK में विद्यार्थियों ने खोजे जीवन के सवाल

इंदौर, 10 अगस्त 2026 | रिपोर्ट – MCVK टीम,

मानव चेतना विकास केंद्र (MCVK), इंदौर में सोमवार को शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय, एमजीएम मेडिकल कॉलेज, डीएवीवी विश्वविद्यालय, इंदौर के 64 विद्यार्थियों एवं फैकल्टी सदस्यों ने शैक्षणिक भ्रमण किया। MCVK परिवार की ओर से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर कॉलेज की फैकल्टी डॉ. श्वेता भोसकर सहित अन्य शिक्षक भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत MCVK के परिचय से हुई। डॉ. साधना राव ने विद्यार्थियों को केंद्र की जीवन-पद्धति और उसके पीछे की सोच से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि MCVK में परिवार समाधान और समृद्धि के साथ जीने की दिशा में सामूहिक रूप से प्रयास कर रहे हैं। यहां संबंध, सहयोग, विश्वास और सहभागिता केवल चर्चा के विषय नहीं, बल्कि इन्हें दैनिक जीवन में समझने और जीने का अभ्यास किया जाता है।

डॉ. साधना राव ने मानवीय मूल्यों की शिक्षा की आवश्यकता पर भी बात की। उन्होंने कहा कि जीवन में जिन मूल्यों की आवश्यकता हमें परिवार और समाज में एक-दूसरे के साथ जीने के लिए पड़ती है, उनकी व्यवस्थित समझ सामान्यतः स्कूली, कॉलेज की शिक्षा में नहीं मिल पाती। जबकि यही समझ मनुष्य को संबंधों की पहचान करने और साथ मिलकर बेहतर ढंग से जीने में सहायक होती है।

इसके बाद डॉ. अभय वानखेड़े के साथ विद्यार्थियों का संवाद एवं प्रश्नोत्तर सत्र हुआ। विद्यार्थियों ने मानव, जीवन, शिक्षा, कामना और कल्पनाशीलता से जुड़े कई सवाल रखे। इसी दौरान एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आया—

“जब हमारी कामना शुभ है, तो हमारी कल्पना अशुभ क्यों हो जाती है?”

इस पर डॉ. वानखेड़े ने कहा कि मानव की मौलिक चाहना का अध्ययन नहीं होने और चाहना अनुरूप जीने की दिशा से भटकाव के कारण ही शुभ की कामना सफल नहीं होती, आपने यह भी स्पष्ट किया की अध्ययन हमेशा शुभ का वास्तविकता का ही संभव है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “प्रकाश एक वास्तविकता है, इसलिए उसका अध्ययन किया जा सकता है। अंधकार की अपनी कोई वास्तविकता नहीं है। यह प्रकाश की अनुपस्थिति का प्रमाण है. जो वास्तविक है, अध्ययन उसी का होता है।”

उन्होंने कहा कि शिक्षा में मानव का समग्र अध्ययन नहीं होने के कारण मनुष्य की मूल चाहना, कामना और कल्पनाशीलता को समझने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाया। जब मनुष्य स्वयं और अपनी मूल चाहना को ठीक से समझता है, तभी वह अपनी कल्पनाओं को भी सही दिशा में पहचान और व्यवस्थित कर पाता है।

प्रश्नोत्तर सत्र के बाद विद्यार्थियों को तीन समूहों में MCVK परिसर का भ्रमण कराया गया। पहले समूह का मार्गदर्शन अशोक भैया, दूसरे का अमित भैया और तीसरे का तारकेश भैया ने किया। विद्यार्थियों ने परिसर में परिवारों के सामूहिक जीवन, उत्पादन, विभिन्न व्यवस्थाओं और रोजमर्रा की गतिविधियों को करीब से देखा।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने विनिमय केंद्र की कार्यप्रणाली को भी समझा। चंदन भैया ने अपनी टीम के साथ विद्यार्थियों को विनिमय केंद्र की व्यवस्था से परिचित कराया और बताया कि यहां परिवारों की आवश्यकता के अनुरूप विभिन्न वस्तुओं की उपलब्धता और विनिमय को किस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है।

इस दौरान विद्यार्थियों का डॉ. उमा दीदी के साथ भी आत्मीय संवाद हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि उन्होंने भी वर्ष 2005 में इसी कॉलेज से पीजी की पढ़ाई पूरी की थी। पिछले छह वर्षों से वे MCVK परिवार से जुड़ी हुई हैं और यहां परिवारों के साथ इस जीवन-पद्धति को समझते और जीते हुए आगे बढ़ रही हैं।

अपने ही कॉलेज की पूर्व छात्रा से MCVK में मुलाकात विद्यार्थियों के लिए विशेष अनुभव रहा। डॉ. उमा दीदी ने अपने छात्र जीवन से लेकर MCVK परिवार से जुड़ने तक की यात्रा और यहां के अपने अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए।

यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए केवल एक परिसर को देखने तक सीमित नहीं रहा। इसने उनके सामने एक महत्वपूर्ण विचार भी रखा कि शिक्षा केवल प्रोफेशन और करियर की तैयारी तक सीमित न होकर स्वयं को, संबंधों को और जीवन को समझने का माध्यम भी बन सकती है।

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