डॉ. रजनी सरीन की प्रेरणा से शुरू हुई परंपरा को नई पीढ़ी ने बढ़ाया आगे
फर्रुखाबाद, 15 अगस्त 2026
रिपोर्ट – न्यूज़ संवाद


स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर फर्रुखाबाद स्थित खत्री धर्मशाला में खत्री सभा की ओर से ध्वजारोहण कार्यक्रम श्रद्धा, उत्साह और देशभक्ति के वातावरण में आयोजित किया गया। समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं और बच्चों ने एक साथ तिरंगे को नमन किया और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग एवं बलिदान को याद किया।
खत्री समाज के लिए धर्मशाला केवल एक भवन नहीं, बल्कि दशकों पुरानी स्मृतियों का केंद्र भी है। इसकी चारदीवारी में करीब पांच दशकों से समाज के अनेक पारिवारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों की यादें जुड़ी हुई हैं। हालांकि यहां स्वतंत्रता दिवस पर सामूहिक ध्वजारोहण की परंपरा बहुत पुरानी नहीं है। कुछ वर्ष पूर्व समाज की मुख्य संरक्षक स्वर्गीय डॉ. रजनी सरीन की प्रेरणा से इसकी शुरुआत हुई थी, जो अब लगातार आगे बढ़ रही है।
कार्यक्रम में उपस्थित समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने युवाओं और बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में व्यस्तताएं कितनी भी हों और हम अपने दैनिक कार्यों अथवा दूसरी सामाजिक गतिविधियों में कितने भी व्यस्त क्यों न रहें, स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर हमें श्रद्धाभाव के साथ ऐसे आयोजनों का हिस्सा अवश्य बनना चाहिए। इससे नई पीढ़ी में देश, समाज और अपनी जड़ों के प्रति जुड़ाव मजबूत होता है।
इस वर्ष के आयोजन की विशेष बात स्वर्गीय डॉ. रजनी सरीन की पुत्री डॉ. पायल सरीन की उपस्थिति रही। अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उन्होंने अपनी मां के पदचिह्नों पर चलते हुए खत्री सभा फर्रुखाबाद के ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने को प्राथमिकता दी। उन्होंने समाज के प्रति अपने परिवार के जुड़ाव को दोहराते हुए विश्वास दिलाया कि वे स्वयं, उनकी छोटी बहन डॉ. कोयल सरीन और भाई डॉ. अंकित सरीन खत्री समाज के सामाजिक एवं रचनात्मक कार्यों में तन-मन-धन से सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।
समारोह में अशोक कपूर, लालजी टंडन, संजय धवन, रामजी कपूर, निमेष टंडन, बब्बू भैया, रॉबिन कपूर, जगन्नाथ टंडन, राजू टंडन, राजकुमार टंडन और आकाश टंडन सहित बड़ी संख्या में खत्री बंधु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में आए सभी समाजजनों का स्वागत खत्री सभा के अध्यक्ष मुदित टंडन, महामंत्री गौरव धवन तथा कोषाध्यक्ष प्रसून टंडन ने किया। आयोजन ने जहां स्वतंत्रता दिवस के गौरव को याद करने का अवसर दिया, वहीं वरिष्ठ पीढ़ी से युवा पीढ़ी तक समाज की परंपराओं और सामाजिक उत्तरदायित्व को आगे बढ़ाने का संदेश भी दिया।