एमसीवीके में 10 दिवसीय ‘विकल्प शिविर’ का शुभारंभ, मानव, प्रकृति और व्यवस्था को समझने पर होगा मंथन

लेखक : मोहित धवन इंदौर, 1 अगस्त। मानव चेतना विकास केंद्र (एमसीवीके), इंदौर में शनिवार को 10 दिवसीय ‘विकल्प शिविर’ का शुभारंभ वंदना गीत एवं स्वागत सत्र के साथ हुआ। 1 अगस्त से 10 अगस्त तक चलने वाले इस शिविर में देश के विभिन्न राज्यों के साथ नेपाल से आए 70 से अधिक शिविरार्थी भागContinue reading “एमसीवीके में 10 दिवसीय ‘विकल्प शिविर’ का शुभारंभ, मानव, प्रकृति और व्यवस्था को समझने पर होगा मंथन”

स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस के विद्यार्थियों ने एमसीवीके में समझा जीवन, शिक्षा और व्यवस्था का वैकल्पिक मॉडल

लेखक : मोहित धवन इंदौर, 31 जुलाई 2026।रिनेसां यूनिवर्सिटी, इंदौर के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस के 60 से अधिक विद्यार्थियों ने शुक्रवार को मानव चेतना विकास केंद्र (एमसीवीके), इंदौर का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने एमसीवीके के सह-अस्तित्व आधारित जीवन मॉडल, मानवीय व्यवस्था, जैविक खेती और वैकल्पिक शिक्षा प्रणाली को निकट सेContinue reading “स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस के विद्यार्थियों ने एमसीवीके में समझा जीवन, शिक्षा और व्यवस्था का वैकल्पिक मॉडल”

बारिश, पहाड़ और नर्मदा के बीच… महेश्वर ने क्यों छू लिया मन?

लेखक : मोहित धवन सुबह की घड़ी में लगभग साढ़े सात बज रहे थे। इंदौर अभी पूरी तरह जागा भी नहीं था कि हमारी कार महेश्वर की ओर बढ़ चली। रात से हो रही हल्की बारिश अब भी जारी थी। आसमान पर बादलों का साम्राज्य था और सड़क के दोनों ओर फैली हरियाली मानो इसContinue reading “बारिश, पहाड़ और नर्मदा के बीच… महेश्वर ने क्यों छू लिया मन?”

गुरु पूर्णिमा पर एमसीवीके में मनाया गया ‘कृतज्ञता दिवस’, सहयोग और सह-अस्तित्व के संदेश के साथ साझा किए जीवन अनुभव

लेखक : मोहित धवन इंदौर, 29 जुलाई।मानव चेतना विकास केंद्र (एमसीवीके), इंदौर में गुरु पूर्णिमा का पर्व इस वर्ष “कृतज्ञता दिवस” के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में गुरु को केवल पूजनीय व्यक्तित्व के रूप में नहीं, बल्कि जीवन में समझ, सहयोग और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाने वाली चेतना के रूप में स्वीकार करने परContinue reading “गुरु पूर्णिमा पर एमसीवीके में मनाया गया ‘कृतज्ञता दिवस’, सहयोग और सह-अस्तित्व के संदेश के साथ साझा किए जीवन अनुभव”

उन आँसुओं ने ज़िन्दगी का मकसद बदल दिया

यह लेख केवल अभिषेक सिंह की सेवा-यात्रा का वर्णन नहीं, बल्कि एक संवेदनशील युवा के भीतर मानवता के जागरण की प्रेरक कहानी है। वरिष्ठ पत्रकार राज खन्ना ने सहज और भावपूर्ण शब्दों में दिखाया है कि कैसे एक छोटी-सी संवेदना आजीवन सेवा के संकल्प में बदल सकती है। यह लेख पाठकों को सोचने और समाज के प्रति अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करता है।

क्या भारत का मिडिल क्लास अब जोखिम लेने लगा है?

क्या सचमुच भारत का मिडिल क्लास बदल रहा है? आखिर क्यों आज के युवा क्रिकेट, स्टार्टअप, सोशल मीडिया और नए व्यवसायों में अपना भविष्य तलाश रहे हैं? क्या यह एक नई पीढ़ी की कहानी है, या फिर बदलते भारत की नई पहचान?

संपादकीय

सोनम वांगचुक के अनशन के बहाने यह संपादकीय भारतीय लोकतंत्र, जनआंदोलनों, सरकार की जवाबदेही और युवाओं की आकांक्षाओं पर गंभीर प्रश्न उठाता है। साथ ही यह कौशल-आधारित शिक्षा, प्रकृति के साथ संतुलित विकास और नए सामाजिक नेतृत्व की आवश्यकता पर विचार प्रस्तुत करता है।

जब एक बेटे की स्मृतियाँ बन गईं सैकड़ों बच्चों के सपनों की रोशनी

जब एक बेटे की स्मृतियाँ बन गईं सैकड़ों बच्चों के सपनों की रोशनी
तन्मय फाउंडेशन: शिक्षा के माध्यम से समाज में बदलाव की एक प्रेरक पहल

38 वर्षों से मानवता की सेवा का पर्याय बना अंकितग्राम सेवाधाम आश्रम

36 वर्षों की सेवा यात्रा का प्रेरक उत्सव—अंकितग्राम सेवाधाम में मानवीय शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समर्पण का अनूठा संगम।